New GST Structure (Effective 22 September 2025)

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Happy Onam and Indian Culture


हैप्पी ओणम और भारतीय संस्कृति

ब्लॉग आउटलाइन – "हैप्पी ओणम और भारतीय संस्कृति"

  1. परिचय: ओणम का महत्व और भारतीय संस्कृति में इसकी जगह

  2. ओणम का इतिहास और इसकी पौराणिक कथा

    • महाबली राजा की कथा

    • भगवान विष्णु का वामन अवतार

  3. ओणम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

    • धार्मिक दृष्टिकोण से

    • सांस्कृतिक दृष्टिकोण से

  4. ओणम के दौरान मनाए जाने वाले प्रमुख रीति-रिवाज़

    • पुक्कलम (फूलों की सजावट)

    • ओणसद्या (पारंपरिक भोजन)

    • वल्लमकली (नौका दौड़)

    • कथकली और नृत्य प्रस्तुतियाँ

  5. भारतीय संस्कृति और ओणम का अटूट संबंध

    • विविधता में एकता

    • पारिवारिक और सामाजिक बंधन

परिचय: ओणम का महत्व और भारतीय संस्कृति में इसकी जगह

भारत विविधताओं का देश है। यहाँ हर त्यौहार सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन जीने का उत्सव होता है। इन्हीं त्यौहारों में से एक है "ओणम", जिसे विशेष रूप से केरल राज्य में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार भारतीय संस्कृति की उस विशेषता को दर्शाता है जिसमें प्रेम, भाईचारा और एकता की भावना छुपी होती है। ओणम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है जो हमें भारतीयता की गहराई का एहसास कराता है।

ओणम फसल कटाई के मौसम का उत्सव है। यह समय प्रकृति की सुंदरता और लोगों की मेहनत का प्रतीक माना जाता है। जब खेत सोने की फसलों से भर जाते हैं, तब ओणम के रूप में पूरा समाज आनंद मनाता है। यहाँ हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो, इस पर्व में सम्मिलित होता है। यही भारतीय संस्कृति का असली सौंदर्य है।




ओणम का इतिहास और इसकी पौराणिक कथा

महाबली राजा की कथा

ओणम के पीछे एक बेहद रोचक पौराणिक कथा है। कहा जाता है कि केरल पर एक समय महान दानवीर और न्यायप्रिय राजा "महाबली" का शासन था। उनके राज्य में हर कोई खुशहाल था—ना किसी को भूख थी, ना अन्याय। लेकिन देवताओं को यह प्रसन्नता रास नहीं आई। उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि महाबली का अभिमान तोड़ा जाए।

भगवान विष्णु का वामन अवतार

भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया और महाबली से तीन पग भूमि माँगी। महाबली ने बिना सोचे-समझे सहमति दे दी। वामन ने अपने पहले कदम में धरती और दूसरे कदम में आकाश नाप लिया। तीसरे कदम के लिए जगह ना बची, तो महाबली ने अपना सिर झुका दिया। भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक भेज दिया, लेकिन उनकी प्रजा के प्रेम को देखकर वचन दिया कि वर्ष में एक बार महाबली धरती पर आकर अपने लोगों से मिल सकेंगे। उसी आगमन की स्मृति में ओणम मनाया जाता है।


ओणम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

धार्मिक दृष्टिकोण से

ओणम हमें भगवान विष्णु की लीला और महाबली की त्याग भावना का स्मरण कराता है। यह त्यौहार सिखाता है कि सत्ता या धन से बढ़कर विनम्रता और सेवा भाव का महत्व है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और भगवान विष्णु तथा महाबली की आराधना करते हैं।

सांस्कृतिक दृष्टिकोण से

धार्मिक महत्व से परे, ओणम एक सांस्कृतिक महोत्सव है। इसमें नृत्य, संगीत, नौका दौड़ और भव्य भोजन शामिल है। यह पर्व समाज में एकता और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है। हर घर फूलों से सजाया जाता है और महिलाएँ रंग-बिरंगी साड़ियाँ पहनकर उत्सव का हिस्सा बनती हैं।


ओणम के दौरान मनाए जाने वाले प्रमुख रीति-रिवाज़

पुक्कलम (फूलों की सजावट)

ओणम का सबसे सुंदर दृश्य होता है घरों के आंगन में बनाए गए "पुक्कलम" यानी फूलों की रंगोली। इसमें ताजे फूलों से विभिन्न आकृतियाँ बनाई जाती हैं। माना जाता है कि इससे महाबली का स्वागत होता है।

ओणसद्या (पारंपरिक भोजन)

ओणम के मौके पर 9 से 11 व्यंजनों वाला "ओणसद्या" भोज परोसा जाता है। यह केले के पत्ते पर परोसा जाता है, जिसमें सांभर, अवियल, थोरन, पायसम और अन्य व्यंजन शामिल होते हैं।

वल्लमकली (नौका दौड़)

केरल की प्रसिद्ध नौका दौड़ ओणम का एक और आकर्षण है। इसमें सैकड़ों नाविक तालबद्ध ढंग से नाव चलाते हैं और यह नजारा देखने लायक होता है।

कथकली और नृत्य प्रस्तुतियाँ

ओणम के अवसर पर पारंपरिक नृत्य जैसे "कथकली" और "तिरुवातिरा" भी प्रस्तुत किए जाते हैं। यह भारतीय संस्कृति की विविधता को प्रदर्शित करता है।


भारतीय संस्कृति और ओणम का अटूट संबंध

भारतीय संस्कृति में हर त्यौहार समाज को जोड़ने का माध्यम होता है। ओणम भी इसी परंपरा का हिस्सा है। यह पर्व हमें "विविधता में एकता" का संदेश देता है। जहाँ उत्तर भारत में दिवाली और होली प्रमुख त्यौहार हैं, वहीं दक्षिण भारत में ओणम सांस्कृतिक एकता की पहचान है।

ओणम से यह संदेश मिलता है कि संस्कृति सिर्फ धार्मिक विश्वासों से नहीं बल्कि सामाजिक बंधनों और आपसी प्रेम से बनती है। यह त्यौहार परिवारों को एकजुट करता है और लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ता है।


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